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Tuesday, September 30, 2008

.........................शब्द ही हूँ मैं..............


शब्द ही माध्यम है मेरे
या
मैं ही हूँ शब्द?
मुश्किल था समझना
खुद को,
कुछ कहूँ
या
न कहूँ
बिना शब्द
पहुँचती है
मेरी भावना
मेरी संवेदना
मेरा प्यार
करता हूँ
विचार हमेशा
बिना शब्दों के
अधूरा हूँ मैं।
खामोश हो जाती है
मेरी शख्सियत
खो जाती है
मेरी पहचान
इसलिए
इन शब्दों को
बनाया मैंने
हथियार
खुद को
पहचानने में
आखिर ये शब्द ही तो
हैं
जो बयां करते हैं मुझे,
मेरे जज्बात को
मेरी आवाज को
इन शब्दों से
ही तो हूँ मैं
और
मेरी अभिव्यक्ति ।

5 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

खामोश हो जाती है
मेरी शख्सियत
खो जाती है
मेरी पहचान
इसलिए
इन शब्दों को
बनाया मैंने
हथियार
खुद को
पहचानने में
आखिर ये शब्द ही तो
हैं
जो बयां करते हैं मुझे,
मेरे जज्बात को
मेरी आवाज को
इन शब्दों से
ही तो हूँ मैं
और
मेरी अभिव्यक्ति ।
बेहतरीन रचना साभार

राज भाटिय़ा said...

सच मे एक शव्द बहुत हे,
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बहुत सही!!

Rachna Singh said...
This comment has been removed by the author.
Rachna Singh said...

nice expressions keep writing