Friday, May 9, 2008

छणिकाएं

१-
दिल के तूफान को किसने देखा,
ये तो सिर्फ आखों का धोखा।
छूना चाहता है समुन्दर चांद
कोउठती हुयी लहरों को किसने देखा है।।
२-
जीवन के होते हैं कई रंग,
बचपन ,जवानी बुढ़ापे में भी जंग।
ये जंग तो पुरानी है,
जीवन एक अधूरी सी कहानी है,
कहानी को पूरा करने में लगा है इंसान ,
ढ़ूढ रहा है अपने ही पैरों के निशान।।
३-
पाने की चाहत , खोने का गम।
दुनिया में होते है इतने ही गम।
किसी से नफरत किसी से चाहत,
तनहाई का आलम बड़ा बेरहम।।


प्रियंका दीक्षित की धारदार कलम से

Monday, April 7, 2008

नींंम का पेड

आसमां में आग बरसा रहा है सूरज,
फैल रही है लू की लपटें
और
उठ रही है
गर्म हवा की धूल
मेघ लेकर नहीं लौटा,
आषाढ़ का पहला दिन।
तपती धरती
और
धुआं-धुआं आसमां के बीच
जीवन झुलसता
धरती भट्टी की भाति ,
धधकता प्रचंड गर्मी में जीवन,
डीहाइड्रेशन का शिकार हो रहा,
ऐसे में
गांव का नीम का पेड़ की छा़व
जो राहत दे रहा ।

Sunday, April 6, 2008

तुझसे दूर जाना चाहता हूँ.....

तुझसे दूर जाना चाहता हूँ,
अपने ही वादे से मुकरना चाहता हूँ,
जो साथ -साथ बिताये हमने पल जिंदगी के,
उनके ही सहारे जीवन बिताना चाहता हूँ,
तुमसे प्यार किया था मैनें बहुत ही,
तुमको चाहा था बहुत मैंने ही ,
और
अब दूरियों को बढ़ाना चहता हूँ ,
मेरी जिदगी से तुम चली जाओ..
और
कभी लौट के न आओं के ,
सारे रासते तलाशता हूँ।
तुम भी खुश थी उन दिनों ,
और
मैं भी खुश हुआ करता था,
बात करने के सारे जतन किया करता था ,
खत जो न आये तेरे तो ,
हर सुबह उन बेजान गलियों को तकता था,
उस दौर से निकलना चाहता हूँ ,
तुमको भुला के एक नये जीवन को पाना चाहता हूँ ,
तुम खुद हीचली जाओ तो बेहतर हो
वर्ना
मैं खुद को मिटाने के सारे कायदे जानता हूँ।
एक नया सफर चहता हूँ ,
तुमको भुला के चलना चाहता हूँ।
और अपने सारे वादे से मुकरना चाहता हूँ।
तुमसे दूर बहुत दूर जाना चाहता हूँ।

Saturday, April 5, 2008

समर्पण......

जी करता
उनमुक्त गगन में उड़ चलूँ,
तुम्हारे सुर्ख होंठों पे,
अपने होठ धरूँ।
जी करता
तुम्हें बाहों में भरू,
और मुट्ठी भीच ,
तुम्हें अपने में समेट लूँ।
जी करता
तुम्हारी सांसंो की महक,
अपने सीने में भरूं,
कुछ कदम साथ चलूँ,
और संग कुछ कदम रोक लूं।
एहसास करता हूँ-
तुम मेरी हर चाहत पर ,
एक लकीर खीच देती,
हर एक रोज,
कल का वादा कर,
कुछ बंदिशें याद दिला देती,
ये नासमझ
इतना तो समझ
प्यार समर्पण है
एक हो जाने का ,
ना ही लकीर,
ना ही बंदिशों का।

अन्तरमन

सोचता हूँ ,
क्या है अन्तरमन ?
और
क्या है बाह्यमन?
मन तो है-
केवल मन,
चंचल है,
उच्छल है,
एकाग्र है,
गंभीर है।
मेरा मन ,
तेरा मन।

Friday, April 4, 2008

आगमन बारिश का........


रिमझिम-रिमझिम
किश्तों -किश्तों में बारिश,
नई स्फूर्ति,
नया उत्साह ,
एकदम धुला-धुला सा आसमां,
एक मुट्ठी किरण,
कुछ सौधी सी ,
मिट्टी की महक,
मन जागा-जागा सा,
कुछ और नहीं ,
ये आगमन है,
बारिश का।।

बिकनी बेबी


खबर गर्म है।
भारत में गरमी पड़नी शुरू हो गई है और इस दौरान कई ऐसी फ़िल्में आ रही हैं, जिनके बारे में मीडिया में चर्चा है कि इसमें कई हॉट दृश्य हैं.यशराज फ़िल्म्स की टशन में करीना कपूर ने बिकनी पहनी है..हल्ला है कि प्रियंका चोपड़ा भी दोस्ताना में बिकनी में नज़र आएँगी...इस फ़िल्म में समुद्र तट पर कई रोमांटिक दृश्य हैं. ये सच है
वैसे ये कोई नयी बात नहीं । इसके पहले भी प्रियंका ऐसा कारनाम फिल्म अंदाज में कर चुकी हैं।और करीना में कई हाट सीन दिये हैं।
अब देखना है कि इन बिकनी बेबी के इन सीन के आजाने से फिल्म में कमायी में कितना योगदान होता है।और क्या ये बिकनी बेबी समंन्दर की ठंड से दर्शकों कोठंडक दे पाती है कि नहीं। अपने नंगेपन से,
वैसे तो बिकनी बेबी ने बिकनी पहहने वाली खबर को खारिज कर दिया है । पर कहा जाता है कि धुँआ अगर उठा है तो आग कहं न कही लगी जरूर है । अब यह तो फिल्म आने पर ही पता चल पायेगा।
वैसे भारती सिनेमा में यह नया दौर शुरू होआ है कि फिल्म आने कुछ समय पहले विवाद जरूर होता है शायद पब्लिकसिटी पाने के लिए। अगर बीते दिनों की बात करें तो फिल्म जोधा का विवाद और फिल्म धूम पार्ट-२ में ( ऐश्वार्या राय के बिकनी को लेकर) विवाद हुआ था । जगह -२ प्रदर्शन हुए और फिल्म हिट रही अब इसके पीछे क्या तर्क है देखने वाली बात होगी।।

 

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