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Tuesday, September 30, 2008

क्या आप जानते है ? - " rakhshanda" । जी हां मैं जानता हूँ

आतंकवाद पर मेरा लेख - "आतंकवाद न तो धर्म , न ही क्षेत्र और न ही जाति देखता है यह तो दुश्मन है मानवता का .......... "
लिंक-' http://neeshooalld.blogspot.com/2008/09/blog-post_8163.html पर कई लोगों की टिप्पणी आयी। जिसमें " rakhshanda" जी की टिप्पणी में सवाल किया गया ? कि "जी नही , ये तो आप कहते हैं ना की आतंक का कोई मज़हब नही होता..लेकिन मीडिया की नज़र में आतंक का मज़हब होता है...तभी तो दिल्ली ब्लास्ट में पकड़े जाने वाले तथाकथित मुजरिमों का तो पूरा बायोडेटा आज बच्चे बव्चे की जुबां पर है..वो कहाँ रहते थे, क्या पढ़ते थे, उम्र कितनी थी चेहरे कैसे थे...लेकिन उडीसा और कर्नाटक में आतंक फैलाने वाले आतंकियों के बारे में उन्हें सांप सूंघ जाता है, हम में से कोई नही जानता नीशू जी की वो भी इंसान हैं या भूत हैं...धरती पर रहते हैं या आसमान से आए हैं...क्या आप जानते हैं?
" rakhshanda" जी की टिप्पणी का जवाब .......
सबसे पहले तो यह बात साफ हो जाये कि उड़ीसा और कर्नाटक में जो भी घटना घटी है उसके लिए जिम्मेदार है राजनीति ? लक्ष्मणानंद की हत्या हुई बदले में बजरंग दल और आरएसएस ने लोगों को उकसाया । साथ ही साथ ईसाई समुदाय पर हमले करवाये और चर्चों पर कहर बरपाया ( तोड़फोड़ की ,आगजनी की )। ईसाई समुदाय पर यह आरोप भी लगाया ये लोगों को पैसे के दम पर धर्म परिवर्तन करा रहे है ( वैसे पहले भी विश्व स्तर पर ऐसे आरोप आते रहे हैं) । गरीब हिन्दू को धन का लालच देकर धर्मानान्तरण कराया जाता है । बात अगर यह सही है तो न्यायालय का सहारा लिया जाना था। लोगों को उकसा कर आम आदमी को इसका शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए था। सरकार भले ही कुछ न करे । यह घटिया राजनीति में सब कुछ सम्भव है पर न कोई भूत है और न ही कोई आसमान से आता है हमारे आपके बीच से ही ये तत्व कार्य कर रहें हैं। हाल के गुजरात दंगे और गोधरा की रिपोर्ट आपने देखी होगी क्या कुछ परिणाम सामने आया नहीं । राजनीति का सफेद कफन पहन कर ये नेता आम लोगों की जिंदगी से खिलौनौ की तरह ही खेलते हैं। और हम कुछ समझ भी नहीं पाते है। क्योंकि हम राजनेता नहीं है न।धर्म कोई भी हो जाति कोई भी पर किसी में मारकाट नहीं है । हिंसा को खरीदा जाता है पैसे से। और खूनी होली खेली जाती है देश के साथ।

5 comments:

हिन्दुस्तानी एकेडेमी said...

आप हिन्दी की सेवा कर रहे हैं, इसके लिए साधुवाद। हिन्दुस्तानी एकेडेमी से जुड़कर हिन्दी के उन्नयन में अपना सक्रिय सहयोग करें।

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सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥


शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा की कृपा से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों। हार्दिक शुभकामना!
(हिन्दुस्तानी एकेडेमी)
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rakhshanda said...

अब मैं क्या कहूँ...रहा सवाल तो नीशू जी, बुरा मत मानियेगा...धर्म एक इंसान का निजी मसला है..वो कौन सा धर्म माने, कौन सा नही, ये उसी पर छोड़ देना चाहिए...जो गरीब ईसाई बन जाते हैं..क्या आपने उसकी वजह जाने की कोशिश की है?
इसकी वजह है गरीबी, भूख...जो धर्म भूख न मिटा सके, उसे कोई कैसे अपना बना सकता है, वहीं दूसरी तरफ़ दूसरा धर्म आप की भूख मिटाता है तो ज़ाहिर सी बात है, भूखा इंसान पहले अपनी भूख की चिंता करेगा नाकि धर्म की..लाठी के ज़ोर पर धर्म का न पालन किया जासकता है ना ही बदलवाया जासकता है...धर्म में अगर शक्ति है तो वो अपनी हिफाज़त ख़ुद करता है....इसके लिए आप किसी को मार नही सकते..ज़बरदस्ती नही कर सकते...करना है तो उन से पहले उन गरीबों की भूख मिटाइये, उन्हें जीने का हक़ दीजिये...वो धर्म कभी नही बदलेंगे...ये बात उन आतंकियों को समझनी होगी , जो खून की होली खेल रहे हैं...

rakhshanda said...

आपको ईद और नवरात्रि की बहुत बहुत मुबारकबाद

Aflatoon said...

ईसाई और मुसलमान क्यों बनते हैं ? - स्वामी विवेकानन्द

राष्ट्र की रीढ

नटखट बच्चा said...

@rakhshanda didi


दीदी एक बात बताइए क्या सबको अपने धर्म के लोगो का ही पेट भरना चाहिए? आप मुस्लिम है तो क्या भूखे मुस्लिमो को ही खाना खिलाएगी?

माना की भूखे को रोटी मिल रही है तो उसे धर्म बदलना चाहिए पर रोटी देने वाले से पूछिए क्या रोटी देने के लिए धर्म बदलना ज़रूरी है? क्या दूसरे धर्म के लोगो को रोटी नही दी जा सकती..

आप क्या करेगी ? रोटी देने के लिए किसी को धर्म बदलने को मजबूर करेगी?

अपना जवाब दीजिए.. यदि आपका जवाब ना है तो फिर बताइए उन ईसाइयो का क्या करे जिन्होने रोटी देने के बदले धर्म बदलने की माँग रखी..

जवाब हो तो दीजिएगा.. मेरे ख्याल से आपके बाबा को पता होगा.. वो एक बेहद सुलझे हुए व्यक्ति है.. और हमेशा आपको सही बात कहते है..

बुरा मत मानियेगा दीदी.. बच्चा हू ना और थोड़ा नटखट भी