जन संदेश

पढ़े हिन्दी, बढ़े हिन्दी, बोले हिन्दी .......राष्ट्रभाषा हिन्दी को बढ़ावा दें। मीडिया व्यूह पर एक सामूहिक प्रयास हिन्दी उत्थान के लिए। मीडिया व्यूह पर आपका स्वागत है । आपको यहां हिन्दी साहित्य कैसा लगा ? आईये हम साथ मिल हिन्दी को बढ़ाये,,,,,, ? हमें जरूर बतायें- संचालक .. हमारा पता है - neeshooalld@gmail.com

Thursday, October 16, 2008

मेरा काव्य - " एक नया जीवन "


खिली धूप मेरे जीवन में ,
आने से तुम्हारे ,
मैं अकेला था ,
जाने से तुम्हारे ,
खामोश थी धड़कन
उदास था ये जीवन ,
आगयी रंगत इसमें,
किया तुमने इसे रौशन ,
आसन नहीं होता खुद को पाना,
राहें थी मुश्किल ,
और था उसी पर जाना ,
हुआ ये खेल किस्मत का ,
जो मिली तुम,
आसान है कुछ भी अब ,
मुमकिन कर पाना ,
ढूढ़ता था एक अजनबी साथी मैं,
इस जमाने में
जाने कहां से आयी तुम ,
मेरे जीवन को करने रोशन ,
पाया है मैंने तुममें ही
एक नया जीवन ।

5 comments:

makrand said...

इस जमाने में
जाने कहां से आयी तुम ,
मेरे जीवन को करने रोशन ,
पाया है मैंने तुममें ही
एक नया जीवन

bahut acchi rachana
regards

श्रीकांत पाराशर said...

neesooji, naya jivan mil gaya, aish keejiye. ek achhi rachna.

Radhika Budhkar said...

अच्छी कविता

रश्मि प्रभा said...

pyaar ka jeevan me yahi sthaan hota hai,bahut achha likha hai.........

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा, बहुत बढिया.