जन संदेश

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Sunday, October 5, 2008

हंसना हो तो पढ़ो ...........नहीं तो भईया आगे बढ़ो समझे .........

१-
क्या आप पेड़ पर चढ़ सकते हो?
क्या आप संजीवनी बूटी ला सकते हो ?
क्या सीना चीर के दिखा सकते हो ?
नहीं ना ।
बेटा बंदर जैसी शक्ल होने से
कोई हनुमान नहीं होता । समझे
२-
खामोश रात ,
नदी का किनारा ,
प्रेमी ने प्रेमिका से
प्यार से,
हौले से,
मुस्कुराते हुए ,
पूछा
डार्लिंग - बीड़ी पिओगी?

8 comments:

शोभा said...

बहुत अच्छा लिखा है. बधाई.

प्रशांत मलिक said...

यही करना पड़ेगा
खुले आम पीने पे तो बेन लग गया है :)

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही अच्छा लगा
धन्यवाद

"VISHAL" said...

बेटा बंदर जैसी शक्ल होने से
कोई हनुमान नहीं होता । समझे


bahut hi achchha vyang,padhkar maja aa gaya.

mehek said...

bahut khub:)

Udan Tashtari said...

बहुत सही.

अविनाश वाचस्पति said...

चकाचक

venus kesari said...

मजेदार बेहतरीन

वीनस केसरी