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Wednesday, October 8, 2008

सारी अटकलें खत्म कर " दादा" ने कहा अलविदा क्रिकेट .........


पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरभ गांगुली ने मीडिया के सामने ये ऐलान कर दिया है कि "दादा" यानी कि सौरभ गांगुली आस्ट्रेलिया सीरीज के बाद टेस्ट क्रिकेट से हमेशा के लिए अलविदा कह देंगे । सौरभ के इस बयान से उनके खलने और न खलने के सारे बयान पर विराम लग गया है । दादा का प्रदर्शन न होने पर जब नयी चयन समीति ने उनका चयन किया गया था तभी से ये बातें सामने आने लगी थी कि गांगुली और चयन समीति में कोई समझौता हुआ है । और सौरभ का बयान आने से सारी बात साफ हो गई । वैसे सौरभ के आस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ चुने जाने पर पूर्व खिलाड़ियों का अलग-२ बयान आये थे। सौरभ के सन्यास की घोषणा के बाद अब अन्त पूर्व खिलाड़यों पर सन्यास का दबाव बढ़ेगा ।
दादा का टेस्ट कैरियर १९९६ में पाकिस्तान के खिलाफ शुरू हुआ था। लगभग १ साल तक दादा ने भारतीय टेस्ट टीम में अपना योगदान दिया । वैसे ऐसा नहीं कि दादा का कैरियर बहुत ही आसान रहा हो । गांगुली ने अपने टीम में बहुत उतार चढ़ाव भी देखे । वैसे हां एक बात मैं कहूँगा कि सौरभ की ही देन है जो भारतीय क्रिकेट टीम आज इस स्तर पर पहुची है। सौरभ अपने आक्रमकता के लिए जाने जाते रहें है । गांगुली ने आस्ट्रेलिया की आक्रमकता को भी चुनौती देकर भारतीय मिजाज को बदला । गांगुली ने ४९ मैच में कप्तानी की और २१ में जीत दिलाकर अभी तक के सबसे अच्छे भारतीत कप्तान बने । दादा ने कुल १२१ टेस्ट मैच खेले ।
एकदिवसीय मैच में ३११ मैंच दादा ने खेले । इग्लैण्ड के खिलाफ लार्डस पर दादा ने नेटवेस्ट सिरीज पर कब्जा जमा कर अपनी टी शर्ट लहरायी थी तो सभी क्रिकेट प्रेमी का दिक खुशी से झूम उठा था। वनडे मैंचों में दादा ने दस हजार रन पूरा करने वालों बल्लेबाजों में अपना शुमार कराया ।
सौरभ गांगुली का सन्यास लेना नये चेहरों के लिए एक अच्छा मौका होगा । इस पूर्व कप्तान का ये फैसला सम्मान जनक है ।

2 comments:

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

sourabh ka yah sammanajanak faisala hai . nikale jane se achcha hai ki khud nikal liye.

jitendra said...

भारत देश मे ना खेल का सम्‍मान हुआ है न खिलाडियों का दादा जरूरी इतिहास बनेंगे और मुसीबत मे अक्‍सर याद किए जाएंगे खासकर जयसूर्या के छक्‍के मारते समय