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Friday, March 6, 2009

"कोशिश करता हुआ वो इंसान" - एक काव्य रचना

नन्ही आशाएं ,

दृढ़ निश्चय,

कुछ करने का जज्बा,

लिए हुए,

कोशिश करता हुआ वो आदमी,


सड़को के किनारे रेंग कर चलता,


हाथ में कुछ गंदी बोतलें

और

एक छोटा झोला लिये,


मेरे सामने से गुजर जाता है ,


बस के इंतजार में खड़ा देखता हूँ उसको,


दूर से आते ,

और

सामने से दूर जाते,

कितना बेबस है,

फिर भी,

चेहरे पे एक सिकन भी नहीं ,


हां कुछ पसीने की बूँदें,


और

कचरे की बदबू के सिवा,


शरीर पर फटे कपडें

गंदे मैंले है ,

शायद न धुला होगा कई दिनों से,

कितना साहस मन में लिये,

करता है ये काम ,


पूरी लगन से ,


पूरी मेहनत से,


कितना अलग है ये ,

उन सभी से ,

जो इसके जैसे हैं,


चाहता तो न करता कुछ ,

बैठा कहीं मांगता भीख,

किसी किनारे पर ,


मिल जाता पेट पालने को कुछ न कुछ,

पर


नहीं मानी हार,


करता है प्रयास ,

जिंदगी की जंग से

और

खुद से भी।

5 comments:

SUNIL KUMAR SONU said...

ji mainkya kahu aapki kavita sab kuchh kah diya aapke baare me.
bahut-bahut sundar kavita 100% good

अशोक कुमार पाण्डेय said...

नीशू जी
अच्छी कविता है।
खूब लिखे और उससे ज्यादा पढे।
कविता मे शब्दो की मित्व्ययिता बेहद महत्वपूर्ण है और वो अभ्यास से ही आती है।

शुभकामनाये

SACHIN JAIN said...

good eyes to see what is happening around......:) keep seeing and writing

surabhi said...

नन्ही आशाये
आपने कवित्ता में इंसानी मजबूत इरादों को
सहजता से उतरा है
जो सराहनीय है
हमारी शुभकामना सदा आपके साथ है

vinodbissa said...

मीडिया व्यू में आपकी रचना ॰॰॰ कोशिश करता हुआ वो इंसान बहुत शानदार है॰॰॰॰ अच्छी गंभीरता से लिखी है॰॰॰ शुभकामनायें॰॰॰