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Saturday, March 28, 2009

प्यार का इजहार -[ एक कहानी] भाग- एक

हैलो - आप कौन ? ( आवाज लड़की की) ।दूसरी तरफ से जवाब- अभिषेक .....फिर से दूसरा सवाल - आप कहां से बोल रहे हैं ? अभिषेक बोला- इलाहाबाद ...... फिर से एक और सवाल - आप मैसेज क्यों कर रहें हैं? ....अभिषेक ने कहा - गलती से चला गया होगा ......लड़की - एक बार नहीं ये गलती कई बार हो चुकी है और फोन घर पर ही रहता है । सभी रहते हैं मुझे प्रोब्लम होती है ..... अभिषेक - हूँ हूँ फिर अभिषेक ने पूछा - आप कौन ? और कहां से बोल रही हैं ? .......थोड़ी देर तक खामोशी रही फिर से लड़की ने कहा - प्रिया ....रायबरेली से । अभिषेक ( मन ही मन प्रसन्न था लड़की का जो फोन था ) ने कहा सही बोल रहीं हैं आप या फिर.....? लड़की बोली - हो सकता है तुम ही झूठ बोल रहे हो ? अभिषेक हड़बड़ा गया शायद ऐसे प्रतिउत्तर की आशा न की हो। तुरंत की कहा नहीं मैं सच कह रहा हूँ ......प्रिया बोली - मैं भी तो सच ही समझ रही हूँ । काफी देर तक बातें होने के बाद फोन कट जाता है ......अभिषेक प्रसन्नता के मारे थामा धरा नहीं कर रहा था । प्रिया से बात करके उसे असीम आनंद मिल गया था जैसे ।


थोड़ी ही देर बाद अभिषेक ने प्रिया के नं पर फोन मिला दिया ...... कई बार बेल जाने के बाद प्रिया ने कहा अब क्या है? अभिषेक बोला -अब कब बात होगी ?.......प्रिया ने कुछ जवाब न दिया कहा जब होनी होगी हो जायेगी ......और प्लीज मैसेज न करना । फोन कट गया .... अभिषेक को प्रिया का यह बर्ताव बिल्कुल भी अच्छा न लगा । ( वह तो पहली बार में सारी बातें करना चाहता था प्रिया से बात करके उसे प्यार का आभाष हुआ था । इसी विश्वास से उसने दुबारा फोन करने का साहस किया )। अभिषेक पल भर में ही दुखी भाव से अपने काम में लगा । बिना किसी उम्मीद के ।

अभिषेक इलाहाबाद में रहकर पढ़ाई कर रहा था । अभी तक उसके जीवन में पढ़ाई का ही साथ रहा किसी लड़की का इस तरह से बात करना उसके लिए नयापन था , आकर्षक था , प्रेम था , । जबकि शहर और यूनिवर्सिटी की दुनिया से बिल्कुल अलग रहना पसंदगी थी अभिषेक की । काम से काम । कुल मिलाकर साधारणपन था । किसी दिखावे में रहना न भाता उसे ........इस फोन के आने से कुछ कुछ दिमागी हलचल से परेशान हुआ था अभिषेक । इस वर्ष बी.ए की पढ़ायी खत्म करने के बाद आगे के भविष्य के बीच प्रिया की बातें हमेशा उसे परेशान करती । फोन नम्बर होते हुए भी वह बात नहीं कर सकता था । केवल और केवल इंतजार कर रहा था प्रिया के फोन का । ( क्या प्रिया भी ऐसा ही सोचती होगी जैसा मैं सोचता हूँ उसके बारे में ? क्या वह परेशान नहीं होती होगी ) । धीरे - धीरे समय बढ़ता गया एक सप्ताह का समय गुजर चुका था अभिषेक की परेशानी बढ़ती ही जा रही थी । कोई फोन जो नहीं आ रहा था प्रिया का .

अचानक प्रिया का फोन आता है एक दिन । प्रिया- हैलो कैसे हो ? अभिषेक - अच्छा नहीं हूँ ? प्रिया - क्यों ? क्या हो गया ? । अभिषेक- कुछ भी नहीं ? अभिषेक ने पूछा - तुम कैसी हो ? और इतने दिन फोन क्यों न किया ? प्रिया- मैं ठीक हूँ ......और फोन किया नहीं तो बात कैसे हो रही है और हंसने लगी ( अभिषेक को यह हंसी जलन भरी लगी पर कुछ न बोला ) । अभिषेक - हां सही कह रही हो किया तो है ही । फिर से प्रिया - तुमने मैसेज क्यों न किया ? अभिषेक - तुमने ही तो मना किया था । भुल गयी क्या ? प्रिया - मैंने ? अभिषेक - हां तुमने ही । प्रिया - ओके । ( अभिषेक अपने दिल की बात कहना चाहता था पर कैसे कहे , शर्म और झिझक ने उसको जकड़े रखा था ) । अभिषेक- और तुम बताओ ? प्रिया - क्या बताऊ ? अभिषेक- कुछ भी ? प्रिया - नहीं अब रखती हूँ । अभिषेक - क्यों ? प्रिया- मां आ गयी हैं , बाय । फोन रखकर अभिषेक का चेहरा उतरा हुआ और खुद से गुस्सा । कि अपने प्यार को बताये कैसे ? क्या करे वो ? कहीं प्रिया को बुरा लगा तो यह सब बातें भी बंद हो जायेंगी जो कभी कभी हो जाती है ।

अभिषेक इसी दौरान अपने गांव चला गया । मां ने बुलाया था होली पर । घर जाने पर वह हमेशा खुश हुआ करता था पर इस बार का उत्साह गायब था । होली बीत जाने पर कैसे जल्दी वहां से वापस आये इलाहाबाद यही बात सोचता .....मां ने अभिषेक से पूछा भी था कि क्यों खामोश और ये चेहरा उतरा उतरा है ? कोई परेशानी याफिर तबियत नहीं ठीक है ? अभिषेक ने सर हिला दिया - सब ठीक है । पर मन मन ही दुखी और व्याथित था । कुछ समझ न आ रहा था उसे । जबकि मां से अभी तक अभिषेक ने सारी बातें कहता था पर प्रिया की बात को बताने से हिचक रहा था । मां क्या सोचेगी ? कहीं मां को खराब न लगे ? ऐसी कई बातें आती रही अभिषेक के जेहन में ।

1 comment:

हिन्दी साहित्य मंच said...

चलिये अगले भाग के इंतजार में रहेंगें । देखते हैं प्यार का इजहार कब होता है या शायद ना भी हो ......कहानी अभी तक हमको बांधने में सफल रही है । शुभकामनाएं