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Friday, September 7, 2007

कौन है कालाहांडी के लिए ज़िम्मेदार?


उड़ीसा के कालाहांडी ज़िले में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, सरकार इन मौतों की वजह पेट की बीमारी बताती है जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इसकी असली वजह भूख है.
कालाहांडी के दुर्गम इलाक़ों में अनाज की कमी और दूषित पानी पीने से सैंकड़ों लोगों की जानें गई हैं.
राज्य सरकार यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि इस पिछड़े आदिवासी बहुल ज़िले में लोगों को पेट भरने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है जबकि वहाँ के लोग पत्ते उबालकर खा रहे हैं. कई स्थानों पर तो लोगों को नौ महीने से अनाज नहीं मिला है. ग़ैर सरकारी संस्थाओं का कहना है कि कम से कम 250 लोगों की मौत हुई है जबकि राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री मनमोहन सामल कहते हैं कि सिर्फ़ 79 लोगों की मौत हुई है. सरकारी आँकड़ों की मानें तो अब तक 180 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन ये हैज़ा और दस्त से मरे हैं.
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था एक्शन एड मरने वालों की संख्या लगभग 350 बता रहा है और इसने बीमारियों के अलावा भूख को भी एक बड़ा कारण बताया है.
उन
गांवों और क़स्बों की स्थिति ज़्यादा ख़राब है जहाँ पहुँचने के रास्ते नहीं हैं. इन इलाक़ों में पहाड़ों और नदियों को पार करके ही जाया जा सकता है .

दुनिया की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जो खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है उसके नागरिकों की ऐसी दशा क्यों हो रही है? इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? कालाहांडी की भयावह सचाई क्या देश को झकझोरने में सफल रही है या देश के बाक़ी लोग अब भी बेपरवाह हैं?

साभार - उपरोक्त चित्र कालाहांडी के न होने के होने के बाद भी वहॉं की दशा दिखाने के प्रयास में सहायक है, उक्त चित्र के लिये इसके मूल चित्रकार को धन्यवाद देता हूं। 

7 comments:

Aflatoon said...

नीशूजी, कलाहांडी के बारे में आपने अच्छा लिखा । ६० के दशक में सरकार भूख से हुई मौतों को मानने से इनकार करती थी।लोकसभा में किशन पटनायक ने इस सवाल को बहुत गम्भीरता से उठाया था।खाद्य स्वावलम्बन का लक्ष्य अब सत्ताधीशो की दृष्टि में पुराना पड़ चुका है।अनिवार्य आयात की शर्त हमारे नीति नियन्ता मान चुके हैं ।भूखमरी और किसानों की बदहाली इसका परिणाम हैं।किसी चैनल को कलाहांडी की व्यथा दिखाने की फुरसत नहीं।अनामदास पूछ रहे थे कि 'कलाहांडी की भूख' को क्या मैक्डॉनाल्ड प्रायोजित करेगा ?

संजय तिवारी said...

बहुत सही विषय उठाया है आपने. वाहवाही जमात को कालाहांडी और गरीब भला क्यों दिखेंगे.

Amarendra Kishore said...

निशूजी यह सुब क्या है? यह तस्वीर कालाहांडी की नहीं है. यह तस्वीर मैंने जादूगोड़ा के मछुआ गाओं में २००१ में ली थी. यह आपने किससे पूछ कर लगाई है? क्या इसे कॉपी राईट का मामला बनाया जाये?

Amarendra Kishore said...

निशूजी यह सुब क्या है? यह तस्वीर कालाहांडी की नहीं है. यह तस्वीर मैंने जादूगोड़ा के मछुआ गाओं में २००१ में ली थी. यह आपने किससे पूछ कर लगाई है? क्या इसे कॉपी राईट का मामला बनाया जाये?
amarendra kishore
amarendra.kishore@gmail.com

Amarendra Kishore said...

निशूजी यह सुब क्या है? यह तस्वीर कालाहांडी की नहीं है. यह तस्वीर मैंने जादूगोड़ा के मछुआ गाओं में २००१ में ली थी. यह आपने किससे पूछ कर लगाई है? क्या इसे कॉपी राईट का मामला बनाया जाये? शर्म कीजिये श्रीमान.
amarendra.kishore@gmail.com

Amarendra Kishore said...

Nishuji:
Kahin aur ki tasveer dikhakar aap Kalahandi ke aslee such ko bewajah vidroop tareekay se samne rakh rahe hain. Aapne to hud kar dee hai. Ab aapko patrakarita ki naitikta se samna karwa dena hoga. Aapne yah nahee bataya ki ISS CHITRA KE CHHAYAKAR AMARENDRA KISHORE hain. Ab meray advocate Sh. Madhvendra Kumar aapko Kalahandi ke such se ru-b-ru karwayengay.
Dhanyavad,
AMARENDRA KISHORE

Amarendra Kishore said...

निशुजी
कहीं और की तस्वीर दिखाकर आप कालाहांडी के असली सच को बेवजह विद्रूप तरीके से सामने रख रहे हैं . आपने तो हद कर दी है . अब आपको पत्रकारिता की नैतिकता से सामना करवा देना होगा . आपने यह नहीं बताया की इस चित्र के छायाकार अमरेन्द्र किशोर हैं . अब मेरे advocate श्री माधवेन्द्र कुमार आपको कालाहांडी के सुच से रु -ब -रु करवाएंगे .
धन्यवाद ,
अमरेन्द्र किशोर
९८१०७४७०००