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Thursday, September 13, 2007

मेरे ख्यालों में आती हो तुम


तुम अब रोज ही आती हो मेरे ख्यालों मे,
जब होता हूँ मैं बिल्कुल अकेला , तन्हा
तब तुम्ही तो देती हो मेरा साथ,
पर ये कोई नहीं जानता सिवाय मेरे कि
मैं अकेला नहीं, तुम भी हो
मेरे साथ, मेरे पास,
एकदम दिल के करीब।
मैं जब मिलता हूँ तुमसे ,
तो कह नहीं पाता कुछ भी तुमसे
ऐसा नही कि बातें नहीं है मेरे पास
पर
डर लगता है कि कहीं इनकार न कर दो तुम
और टूट जायें मेरे सपने,
मेरी ख्वाहिशें।
जो मैने देख रखें है तुम्हारे लिए,
और फिर छूट न जाये तुम्हारा साथ,
तुम बंद न कर दो मेरे ख्यालों मे आना।
इसलिए सोचता हूँ हकीकत में सही न सही,
पर
ख्यालों में तो तुम मेरी हो,
कोई न कर सकता है मुझे तुम से अलग ।
अगर हो भी गया तो क्या तुम रह पाओगी मेरे बगैर ,
नही कभी नहीं ।
मैं तो चाहता हूँ कि तुम आती रहो,
यूँ ही हमेशा
मेरे ख्यालों में मेरे सपनों में,
और
देती रहो मेरा साथ
बढाती रहो मेरा विश्वास ,
क्योंकि जानती हो तुम कि मैं नहीं रह सकता तुम्हारे बगैर,
तुम ही तो हो मेरी सांसे ,
जिसके सहारे जी रहा हूँ मैं ।

2 comments:

Manish said...

यूँ ही आपका ख्वाब आपकी प्रेरणा बनता रहे.

Udan Tashtari said...

वाह नीशू भाई, खूब ख्वाब है यह तो.