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Friday, September 7, 2007

क्या यही है असली तस्वीर हमारी ?


हिन्दुस्तान की आबादी विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। तथा भौगोलिक स्थिति के दृष्टिकोण से हम विश्व में सातवें नम्बर पर है। आबादी की जो दर हे उससे देश में जो सबसे बड़ी समस्या उभरकर सामने आयी है वो है- रोटी, कपड़ा और मकान। भारत में अब खाद्ययान की समस्या और कपड़ा उद्योग की समस्या से काफी हद तक तो निजात पा चुका है परन्तु सबसे विकट समस्या रहने की है, मकान की है।भारतीय अर्थव्यवस्था जिस तरह से विकास के पथ पर अग्रसर है उससे तो यही परिणाम सामने उभरकर आ रहा है कि जो अमीर है वो और अमीर होंगे तथा गरीब तो गरीब है ही। उनकी दशा तो पहले से ही दयनीय है अब आगे क्या होगा इस गरीब जनता का ये तो भविष्य ही बतायेगा। मेट्रो सिटी की बात तो दूर, गावों में भी जीवन यापन करना दूभर भी हो गया है। रोजगार न होने के कारण गांव से किसानों का पलायन शहरों की तरफ तीव्र गति से हो रहा है ।जिससे शहरों का विस्तार तेजी से हो रहा है । शहरी जीवन की चकाचौंध में भोला -भाला व्यक्ति किस प्रकार से अपना और अपने परिवार का जीवन निर्वहन कर सकता है?सरकार ने २६ जनवरी एवं १५ अगस्त पर अनेक लोक - लुभावन योजनाऐं लागू कर राष्ट्र की समृद्धी के लिए जो प्रयास किया उससे कुछ खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। सच्चाई साफ है योजनाएं दिखावा मात्र लगती है । फायदा जिसको होना चाहिए वह जानता ही नहीं है कुछ? गरीब किसान को तो जरूरत है बस दो जून की रोटी की । जिसे पाकर वह जीने के लिए सांसे ले सके।

1 comment:

संजय तिवारी said...

यह भी हमारी ही तस्वीर है. दुर्भाग्य से इसे अपनी तस्वीर मानने से हम कतराने लगे हैं.
मुझे लगता है अभी आप 24-25 की उम्र में हैं इसलिए केवल संवेदना से अपनी बात रख रहे हैं. दुनिया को तथ्य चाहिए, खोजबीन चाहिए तब जाकर लोग कहते हैं यह सही कह रहा है और हमें भी लगता है कि शायद हमने सही तरह से बात पहुंचाई है.