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Wednesday, April 8, 2009

मेरा शहर और यहां के लोग ..............आखिर बदलना पड़ा आशियाना मुझे

कल मेरी पोस्ट" मेरा शहर और यहां के लोगों का कारनामा " कुछ बातें आपके सामने पेश की थी बात मैंने सोचा कि खत्म हो चुकी है पर अभी कुछ खेल था शाम को मैं बाहर निकला घूमने के लिए ( बारिश के होने से मौसम सुहावना हो गया था ) तभी मेरे मकान मालिक का फोन आता है कि आप कहां हैं कमरे पर जाईये मैंने कहा कुछ देर में पहुंचता हूँ आनन फनन में कमरे पर आया ( मौसम का मजा किरकिरा लगने लगा ) मेरे मकान मालिक पहले ही से थे मैंने पहुंचते ही हाथ मिलाया फिर कहा कहिये हम हाजिर है ( जैसे मेरी आदालत में पेशी हो किसी मुजरिम की तरह ) मकान मालिक ने कहा - आपको कमरा छोड़ना पड़ेगा ? मैंने कहा - ठीक है उसने बात आगे बढ़ाई - कि लोगों को ऐतराज है लड़कियों के आने से मैंने कहा- आपको भी है ऐसा लगता है और क्या कहा हैं लोगं ने वो भी कह दीजिये पर कुछ खास कहा मैंने कहा - मुझे कुछ भी नहीं कहना क्योंकि मैंने ऐसी कोई गलती नहीं की है कि मुझे झुकना पड़े रही बात कमरे की तो बेशक आपका घर है मैं कुछ एक दो दिन में पलायन करता हूँ


अपना तो क्या कुछ सामान होता है समेटना इसलिए रात ही पैकिंग पूरी कर ली और आज नये आशियाने को तलाशना होगा मेरे जीवन की पहली घटना जिसको शायद ही भूलना होगा आज का दिन कुछ परेशानी लेकर आया वो भी इसलिए क्योंकि समय नहीं निकलता इस काम के लिए

कल
की सारी घटना मैंने अपनी मां से बताई मां हसने लगी कहने लगी यही दुनिया है - तुम वहां से कमरा बदल लो और अपने आपको भी बात मानकर मैंने मां से कहा सही कहा आपने कुछ ऐसा ही करूँगा अब मैं तो कमरा बदल रहा हूँ और सोच भी पर इस लोगों का क्या कभी बदल पायेंगें ये अपनी कायीयां सोच को .............शायद कभी भी नहीं हम वही देखते हैं जो हमें देखना होता है बात नजरिये की है और कुछ भी नहीं
कल की पोस्ट में कुछ लोगों ने अपनी राय दी सभी को धन्यावाद कुछ ऐसा ही हमारा शहर और यहां की सोच

10 comments:

Rachna Singh said...

Neeshu
I am not justifying what happened but since we also used rent out accomdation to sinlge man i can relate with the landlords view point
in 90 out 100 times problems happen that are not the landlords doing but because they are the owners it always bounces back on them .

sometimes girls parents turn up and tell us that we had a moral responsibilty and if we knew that the girl was visiting our tanent then we should have checked them !!!!!!
looks like we were supposed to act as moral guardians so the best was they we stopped renting the place

अनिल कान्त : said...

dont worry ...room to mil hi jayega dost

हिन्दी साहित्य मंच said...

नीशू जी , बहुत ही अजीब बात है यह । पर कोई बात नहीं ऐसा होते देखा है कई बार आपभी इसी का शिकार बने हैं । आपको कुछ परेशानी तो उठानी पड़ेगी पर वहां से छुटकारा जरूर मिल जायेगा । आपना काम करते रहिये इन लोगों का यह तो ऐसे ही है । और रहेंगे हमेशा । शुभकामनाएं

Nirmla Kapila said...

neeshooji aaj hi apki pichhli post bhi padhi ye ek shahar ki nahi sare desh ki soch hai aur ise badalne me abhi kuchh vakt lagega fir bhi agar apka irada nek hai to apko parvah karne ki chinta nahi hai naye ghar ki shubh kaamnaayen

mehek said...

kabhi kabhi aise hasde ho jate hai,naye aashiyane ke milne ke liye shubkamnaye.

Anil said...

लोग कमरों की जगह को किराये पर देते फिरते हैं, लेकिन दिल में जगह नहीं बना पाते!

आलोक सिंह said...

नीशू जी परेशान मत हो , हमने भी गाजियाबाद में ६ साल में १७ मकान बदले थे , शुरू-शुरू में थोडा अजीब लगता था लेकिन बाद में आदत पड़ गयी थी . कुछ मकान तो इसलिए छोड़ दिए की वहां कोई दिक्कत नहीं थी .
आप को जल्दी एक अच्छा मकान , मकानमालिक और पडोसी मिले इसी शुभकामना के साथ !!!!!!

संगीता पुरी said...

कोई बात नहीं ... मकान तो मिल ही जाएगा ... नए और अच्‍छे मकान के लिए शुभकामनाएं।

आशीष कुमार 'अंशु' said...

Nai jagah se nay post kaa intajaar...

मोहन वशिष्‍ठ said...

नीशू जी क्‍यों चिंता करते हो पैसे देते हो फ्री में थोडे ही रहते हो और बहुत मकान मिलेंगे अब इनके लिए अपना व्‍यवहार थोडे ही ना छोड सकते हैं ये मकान मालिक कुछेक को छोड कर सभी ज्‍यादातर ऐसे ही होते हैं और सोचते हैं कि जो किराए पर मकान ले रहा है वो बस यूं ही है जबकि ये नहीं सोचते कि बंदा किस कारण से अपने घर को छोड तुम्‍हारे घर पर एक कमरा या दो कमरा किराए पर लेकर रह रहा हे