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Friday, April 3, 2009

अनजाने रिश्ते का एहसास

अनजाने रिश्ते का एहसास,
बयां करना मुश्किल था ।

दिल की बात को ,
लबों से कहना मुश्किल था ।।


वक्त के साथ चलते रहे हम ,
बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।

खामोशियां फिसलती रही देर तक,
यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।


सब्र तो होता है कुछ पल का ,
जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

वो दूर रहती तो सहते हम ,
पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।।

अनजाने रिश्ते का एहसास ,
बयां करना मुश्किल था ।।

7 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

खामोशियां फिसलती रही देर तक,
यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।

मीठी मधुर लगी आपकी यह रचना ..सुन्दर अभिव्यक्ति

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया रचना.

mehek said...

वो दूर रहती तो सहते हम ,
पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।।

waah bahut sunder

आलोक सिंह said...

बहुत अच्छी रचना
सब्र तो होता है कुछ पल का ,
जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

हिन्दी साहित्य मंच said...

बेहद सुन्दर भाव । अच्छी रचना के लिए शुक्रिया बहुत बहुत आपको । धन्यवाद

राज भाटिय़ा said...

वो दूर रहती तो सहते हम ,
पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।।
वाह वाह क्या बात है जी, बहुत सुंदर.
धन्यवाद

श्यामल सुमन said...

वाह। मशहूर शेर है-

दिल की बात लबों पे लाकर अबतक हम दुख सहते हैं।
हमने सुना था इस बस्ती में दिलवाले भी रहते हैं।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com