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Friday, February 6, 2009

सामाजिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं ऐसी घटनाएं .....जिया और चांद मोहम्मद दोषी कौन ?


चंद्र मोहन से बने चांद मोहम्मद अपना धर्म परिवर्तन कर प्यार को पाया । एक पत्नी के होते हुए दूसरी महिला से प्यार हो जाना आजकल का आम ट्रेंड हो गया है । जिया ने खुलकर अपने प्यार का इजहार बेझिझक कर डाला । यहां तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था । पर एकाएक चंद्र मोहन को अपनी पहली पत्नी और एक बेटी की याद आ गयी । और जिसके चलते वो अपनी दूसरी पत्नी जिया से नाता तक तोड़ने को तैयार हैं । इस तरह से देखा जाय तो चंद्रमोहन ने सारे नाते रिश्तों को मजाक बनाते हुए दो जिंदगी को बर्बाद कर दिया है । क्या चांद मोहम्मद को करना चाहिए जिससे सारे सरोकार बने रहें । सामाजिक रूप से दो पत्नी के पति हमारी परम्परा के खिलाफ है । और इस तरह के फैसले से सामाजिक असमानता आयेगी ।
जिया (चांद की दूसरी बीबी ने )चांद मोहम्मद को ४८ घंटे का समय दिया है । कि अगर वे वापस उसके पास न आये तब कानून का सहारा लेगीं। यहां पर जिया और कुछ कर भी नहीं सकती । मामला अगर कोर्ट में जाता है तो लम्बा खिचेंगा। और न्याय के रूप में जो भी फैसला आयेगा वह किससे पक्ष में जायेगा यह देखने वाली बात होगी । पर यहां पर महिलाओं को चांद मोहम्मद जैसे लोगों से सोच समझ कर ही प्यार या फिर कोई रिश्ता बनाना चाहिए था। इस तरह की स्थिती से समाज में अस्थिरता आयेगी । साथ ही साथ कई जिंदगियों के साथ खिलवाड़ हो रहा है जिसका परिणाम अच्छा तो कतई न होगा ।
भारतीय समाज में प्यार को कतई प्राथमिकता नहीं दी हुई है । पर संविधान में प्यार को पूरी छूट है अगर महिला और पुरूष बालिग है तब । लेकिन सवाल यह है कि इस तरह से गैरजिम्मेदाराना हरकत और उसके बाद जो स्थिति बनती है उसका क्या उपाय होना चाहिए । किसका दोष दे इन परिस्थिति में । गुनहगार कोई भी क्यों न ? हो पर इसका असर हमारे समाज के लिए हानिकारक है । प्यार को खिलवाड़ बनाना कितना उचित और इसका क्या परिणाम होता है हमारी नस्लों पर इसका कोई जवाब नहीं है ।

1 comment:

Kishore Choudhary said...

इस घटनाक्रम ने वैसे मुझे ज्यादा प्रभावित नही किया फ़िर भी स्त्री पुरूष के जटिल संबंधों का आधार लिए होने के कारण मैंने कुछ पोस्ट पर टिप्पणीयाँ की थी आपके यहाँ आ कर मैं जिया (?) और फिज़ा (अनुराधा बाली ) में उलझ गया. नामों के झमेले से बाहर देखें तो आपने उचित ही लिखा है.