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Sunday, May 24, 2009

एक नौकरी के लिए क्या क्या करना पड़ता है ................?

अपनी सी वी बना लो अच्छी सी ............कुछ ऐसे बिन्दुओं को हाईलाइट कर देना जिससे तुम्हारा व्यक्तित्व कुछ अलग या सबसे अलग नजर आये और हां एक ही पेज की बनाना क्योंकि आजकल यही ट्रेंड है समझ गये ना और कोई बात हो तब मिसकाल देना और वहां पहुंचते ही मेरा रिफ्रेंस देना जिससे तुम्हारी कुछ मदद शायद हो जाये ............ठीक है सर । अच्छा अब फोन रखता हूँ आफिस के लिए निकलना है मुझे भी .......जीसर । एण्ड लास्टली आल द बेस्ट ........कूल माइंड होकर अपना इंटरव्यू देना । ओके सर जी बाय एण्ड थैंक्स यू .............। ड्रेस के लिए कुछ ऐसा पहना जाये जो शालीन लगे और सभ्य भी पर अगर जाब देना होगा तो क्या कपड़े ही देखकर देंगें पर फिर भी ध्यान तो जाता ही है पहनावे पर ........................चलो अब बहुत सवाल हुआ अपने आपसे जल्दी तैयार होकर निकलना होगा ........वरना बस तो निकल जायेगी ही साथ में जाब मिलने का मौका भी ................. जल्दी जल्दी बस स्टैण्ड पर पहुंचते हुए चलो शुक्र है अभी समय कुछ बाकी है बस के आने का .............. इंतजार करते करते चलो चाय ही पी लिया जाय .......... दुकान से चाय पीते हुए बास का इंतजार करना मुश्किल न था ... बस आयी पर बाप रे कितनी भीड़ है चढ़ना है इस मेले में ठेल-ठाल के ...............किसी तरह से अंदर हुए तो बीच में अपने आप ही आ पहुंचे पीछे वालों की मदद से । कपड़े का तो सत्यानाश ही होगया । पर चलो साफ तो है ही ..........बमुशकिलन टिकट के पैसे जेब निकाल पाया वो भी तब जब पास की सीट पर बैठी लड़की को फाइल दिया तब ..................आराम से खड़े होना भी कितना मुश्किल है कोई आगे से तो कोई पीछे धक्का देते हुए कुचलता निकल जा रहा है सबको जल्दी है......................जिस चैनल तक जाना है वह अब आने वाला ही है इसलिए बार बार झकना पड़ रहा है खिड़की से कही स्टैण्ड आगे न चला जाये ...........................बस स्टैण्ड से उतर कर पूछना पड़ा मेरे साथ लड़की भी उतर गयी पर उससे न पूछा कुछ भी । बताये हुए रास्ते पर चलते हुए मंजिल पर आ धमके ..................कुछ लोग पहले से ही मौजूद थे । मैं भी एक कोने में खड़ा हो गया अपनी फाइल पकड़े कुछ देर में वो साथ वाली लड़की भी आ पहुंची ( बस वाली ) । उसने मुझे ना देखा ........ मैं गेटकीपर के पास जाकर कहा जो सर ने कहा था कहने को .......................उसने कुछ देर रूकने को कहा मैं फिर से अपने को कोने में कर लिया । लड़की भी पास ही खडी थी पर फिर भी बात न की हमने ।।।। गेटकीपर ने मुझे बुलाया और अंदर जाने के लिए कहा ..................मैं अंदर गया डरता हुआ । वर्मा जी के सामने की सीट पर बैठ गया फिर उन्होंने ने जो जो पूंछा ............... मैं बताता चला गया । कोई खास बाते न हुई फिर मुझसे कुछ देर रूकने को कहा ........................ मैं बाहर आ गया खुश भी था कि अभी तक सब कुछ ठीक ही ठाक था । बाहर आकर चैन से कुर्सी पर बैठा पानी पीकर । मेरे पास लड़की बैठी रही और बार बार शायद अपनी बारी का इंतजार कर रही थी । मैंने उसे छेड़ दिया । अरे आप भी यहां । उसने कहा ..............हां नौकरी की तलाश हम भी आये हैं .................आप कैसे ? अरे हम भी उसी के लिए आये हैं । आपक तो इंटरव्यू हो गया ना । हां हो ही गया है ( मैंने कहा ) .................... कुछ देर ऐसे ही बातें होती रही उसका नं नहीं आया था अभी तक और मुझे दुबारा से बुलाया सर ने और कहा कि आप जाईये जशेा होगा मैं बता दूंगा आपके सर को ........................मैं खुश था बाहर आया और लड़की के पास खड़े होते हुए बोला बेस्ट आफ लक और मैं तो अब चलता हूँ ............. bye . शाम को फिर से मैंने अपने गुरू जी को काल की तो फोन किया उन्होंने और कहा यार एक ही जाब तो थी और वह किसी और को मिल गयी ........ मैं दुखी हो गया सर में बहुत समझाया कि कभी न कभी तो सफलता मिलेगी ही ..................... मैं एक दिन किसी काम के लिए फिर से बस से ही ज रहा था और संयोग वश वो लड़की मिल गयी हाय हैलो हुआ ।।।।। मैंने पूंछा आप का क्या हुआ कहीं जाब मिली ................... वह मुस्कराई और कही कि मुझे वहीं जाब मिल गयी जहां आप भी इंटरव्यू देने आये थे ........................उसने कहा और आपका क्या ? मैं कहा मैं भी जाब कर रहा हूँ किसी चैनल में ( झूठ बोल दिया ) । फिर आगे उतर कर लिया । शायद यही है किस्मत कितना कुछ करने पर भी एक नौकरी के लिए क्या क्या नहीं करना पड़ता ।।

4 comments:

हिन्दी साहित्य मंच said...

भैया हाल आजकल कुछ ऐसा ही है।सही ही लिखा है कि जुगाड़ होने पर भी काम नहीं निकल रहा है ।

shiv said...

hal kuch aisa hi hai dost

Mithilesh dubey said...

सच को लिखा आपने दोस्त अच्छा लगा ।

अनिल कान्त : said...

आपने सच को बहुत खूबसूरत और अच्छे अंदाज़ में लिखा