जन संदेश

पढ़े हिन्दी, बढ़े हिन्दी, बोले हिन्दी .......राष्ट्रभाषा हिन्दी को बढ़ावा दें। मीडिया व्यूह पर एक सामूहिक प्रयास हिन्दी उत्थान के लिए। मीडिया व्यूह पर आपका स्वागत है । आपको यहां हिन्दी साहित्य कैसा लगा ? आईये हम साथ मिल हिन्दी को बढ़ाये,,,,,, ? हमें जरूर बतायें- संचालक .. हमारा पता है - neeshooalld@gmail.com

Thursday, November 29, 2007

तो हम जाने

इन आसुओं को सब सिखाओ तो हम जानें,
गैरों के लिए इनको बहाओ तो हम जानें,
जो दे गया था ऑंख में रखने के लिए ये मोती,
कुछ उसके लिए भी बचाओ तो जानें,
जलतें हैं दिल जो यहाँ नफरत के तेल सेउस
लौ को प्रेम से बुझाओ तो हम जाने
जो रोशनी की चाह में अब तक बुझे रहे,
के लिए खुद को जलाओ तो हम जाने,
मिट्टी पर बनाये गये हैं आशिया बहुत,
तुम रेत पर महलों को बनाओ तो हम जाने,
आये हो जो हर बार तो आये हो पूछ कर,
पूछें बगैर दिन में जो आओ तो हम जानें।

1 comment:

Mrs. Asha Joglekar said...

जलतें हैं दिल जो यहाँ नफरत के तेल से
उस लौ को प्रेम से बुझाओ तो हम जाने
बहोत खूब !