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Friday, June 4, 2010

मेरा वैचारिक मतभेद जरूर था ( जो अब दूर हो चूका हैं...मुझे दुख है इस विवाद से ) पर मनभेद कभी भी नहीं रहा ..और न है ...और न ही रहेगा कभी .neeshoo tiwari


कभी कभी कुछ ऐसा हो जाता है.....जिसकी हम उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं .......पर हमें बाद में पछतावा जरूर होता है.......पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है..........( दिल्ली ब्लोगर सम्मलेन को लेकर )....वैसे भी क्या हम अपने से बड़ों के बिना आगे चल सकते हैं क्या ? तो मेरा जवाब होगा नहीं ........यही बात ब्लोगिंग में भी लागू होती है.......हाँ मेरा वैचारिक मतभेद जरूर था ( जो अब दूर हो चूका हैं .........मुझे दुख है इस विवाद से ) पर मनभेद कभी भी नहीं रहा ........और न है ................और ........न ही रहेगा कभी ...............

पने से अनुभवी और बड़े ब्लोगर ( अविनाश जी , अजय कुमार झा जी ,,,आदि से ) से बहुत कुछ सीखा है मैंने .........और हाँ बिना बड़ों के आशीर्वाद और प्यार और स्नेह के हम खुद को ( हिंदी ब्लोगिंग को ) आगे कैसे ले जायेगे ........हमको आप सभी का साथ चाहिए .........वैसे भी मैं आप से छोटा हूँ तो ये मेरा अधिकार की आपका स्नेह हक़ से ले सकूँ .............

सबसे अहम बात की मेरी पिछली लिखी पोस्ट अगर आप लोगों के कष्ट हुआ है .......तो इसका मुझे खेद और बेहद अफसोश है...........और भविष्य में ये प्रयास करूँगा की ऐसे किसी भी विवाद को पनपने ने दिया जाये ( आपस में बातचीत करके भी मामले को सुलझाया जा सकता है.........जो मैंने खुद नहीं किया ...पर आगे ध्यान रखूँगा )

...........अविनाश जी 
आपसे ही सीखा गलतियाँ सुधारना 
आपसे जी जाना खुद से आगे बढ़ना 
आपसे मतभेद रहा 
क्यूंकि 
नीशू के समझने में फेर रहा ....
फिर हम मिल जायेगे 
एक नया दीपक जलाएंगे
ब्लोगिंग के सार्थकता का 
सबको पाठ पढ़ाएंगे

चलते चलते

अविनाश जी रविवार को मेरठ आ रहे हैं मुझसे मिलने ..............केवल मुझे से मिलने .......अरे मिथिलेश भी आ रहा है........आप का इन्तजार है....... ऑफिस का समय पूरा गया है ..........अब जा रहा हूँ .....पर एक ही बात की वैचारिक मतभेद को कभी मनभेद न होने दीजियेगा .........हिंदी ब्लोगिंग की सार्थकता की ओर कदम बढ़ाना है...........

30 comments:

कूप कृष्ण said...

क्यों आ गई अकल ठिकाने?

Anonymous said...

मान गये उस्ताद।पाबला जी का नाम नहि लिया

Anonymous said...

सरदार से मराने में मजा आता होगा ना

Anonymous said...

अजय अविनाश से बहुत कुछ सीख हैइ लिया है

Anonymous said...

अब सरदार से भी सीखना

Anonymous said...

जितना गंद है ना तुम्हारे पास उसे मत हटाना क्योंकि तुम तो बडे वो हो

कूप कृष्ण said...

अरे ये कौन आ गया बेनामी

Anonymous said...

अविनाश तो फट्टू है

Anonymous said...

और तू भी है फट्टू

Anonymous said...

कुछ भी कर लो बेटा सरदार तो तुमको छोड़ेगा नहीं आज ही दिखा था अपने वकीलों के साथ

Anonymous said...

पिछले साल तो एक ने अपनी ब्लॉगिन्ग की दुकान बन्द कर दी थी कोर्ट पहुन्चने के बाद

कूप कृष्ण said...

अब मेरा काम कोई और कर रहा तो मैं क्यों यहां रहूँ?

Anonymous said...

खबर तो यह भी है कि उसकी कम्पनी वाले भी तुमारा पता लगवा रहे

Anonymous said...

अब उनके खिलाफ भी तो तुमने बका है ना

Anonymous said...

अब जायो अपनी उसी अम्मा की गोद में जो तुमको 8 दिन से लोरी सुना रही थी

Anonymous said...

भगवान की रचना होती ही ऐसी है लोरी सुनाने वालि

Anonymous said...

लोरि सुन कर कोई सोता है कोई होश खोता है

Anonymous said...

तुअम अब अपनि नीन्द खो दोगे बबुया

Anonymous said...

तुम भी खो दोगे तुम्मरे परिवार वाले भी खो देन्गे

Anonymous said...

जब तुमारे खिलाफ होगी कानूनी कार्वाई

Anonymous said...

और तुम क्य ासमझतेहो कि अजय तुमको छोड देगा

Anonymous said...

इस बार तो तुमारी मार के रहेगा

Anonymous said...

बच रे रेना रे बाबा बच के रेना रे

Anonymous said...

अब हो रहा कोटा पूरा मेरा

Anonymous said...

तू भी क्या नाम याद रखेगा मेरा

Kumar Jaljala said...

फिल्म- देशप्रेमी
गीत-महाकवि आनन्द बख्शी
संगीत- लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल
नफरत की लाठी तोड़ो
लालच का खंजर फेंको
जिद के पीछे मत दौड़ो
तुम देश के पंछी हो देश प्रेमियों
आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
देखो ये धरती.... हम सबकी माता है
सोचो, आपस में क्या अपना नाता है
हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन संभालेगा
कोई बाहर वाला अपने घर से हमें निकालेगा
दीवानों होश करो..... मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो

मीठे पानी में ये जहर न तुम घोलो
जब भी बोलो, ये सोचके तुम बोलो
भर जाता है गहरा घाव, जो बनता है गोली से
पर वो घाव नहीं भरता, जो बना हो कड़वी बोली से
दो मीठे बोल कहो, मेरे देशप्रेमियों....

तोड़ो दीवारें ये चार दिशाओं की
रोको मत राहें, इन मस्त हवाओं की
पूरब-पश्चिम- उत्तर- दक्षिण का क्या मतलब है
इस माटी से पूछो, क्या भाषा क्या इसका मजहब है
फिर मुझसे बात करो
ब्लागप्रेमियों... आपस में प्रेम करो

Suman said...

nice

Anonymous said...
This comment has been removed by a blog administrator.
सुनील दत्त said...

good

राजकुमार डॉगी said...

mai lund ka pyasa meri gand maro aur bajao uska भोपा