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Saturday, May 22, 2010

ब्लोगिंग के लिए गूगल पर होना चाहिये केस ? ( क्योंकि आप का भी मान सम्मान है ?) एक विचार

आज मेरी एक पुराने  ब्लोगर से बात हो रही थी...जो की इलाहाबाद से जुड़े है  .........ब्लोगिंग के बदलाव  पर भी काफी देर बात हुई ..वो भी मेरी ही तरह कुछ  दिनों से  गायब थे .....इसका उनको जरा भी दुःख नहीं है ........हाँ अफशोस जरुर है ....वह इसलिए क्योंकि आज के बदलाव में बहुत से सुधार होने पर जोर देते है ....ब्लॉगर और ब्लोगिंग दोनों पर अपनी राय व्यक्त  करते हैं ......एक तो यह की इस बदलाव में अपने आप को ढाल ले या फिर खुद से प्रयास करें ....हाँ इस दौरान कोई हमारा सहयोग करेगा तो कोई विरोध भी करेगा .........लेकिन अपनी बात को सब के सामने रखना तो होगा ही ...अक्सर होता है कोई भी पाठक ब्लॉग पर आता है और अपनी बात कहता है ...यहाँ तक तो ठीक है ...
.पर आकर असभ्य भाषा का प्रयोग भी करने वालों की जमात कुछ कम नहीं है .....हमेशा ही लोग करवाई की धमकी भर देते है और बाद में मामला कुंद हो जाता है .....क्या ऐसी चेतावनी बस कहने भर को होती है या फिर डराने को होती है ...
दूसरा मुद्दा .....बात होती है कमेन्ट पर पाबन्दी की .....कई तो ब्लोगर तकनीकी रूप से इससे अनजान होते है और दूसरा की कोई बेनामी ही नहीं नाम से भी लोग बुरा भला कहते है ...उनका क्या ? और साथ ही आज भी ब्लोगिंग में अपना नाम गिनाने  से पीछे नहीं हटते हैं ...आखिर ऐसे लोगों का क्या इलाज  होना चाहिए  ????......मैं तो पाठक को बोलने का पूरा मौका देना चाहता हूँ ....हाँ आप इससे अलग सोच सकते है ....कुछ ब्लोगर का कहना है की जो ब्लोगर कमेन्ट पर बेनामी को नहीं रोकते इसमे उनकी भी मिलीभगत होती है ...और वह  ब्लोगर  बेनामी से बड़ा दोषी है .....पर यहाँ यह बात गौर करने वाली है की क्या हम दिन भर कंप्यूटर के सामने बैठ कर यही करते रहें ? अगर किसी ने नाम से ही गलत पहचान से किसी को गाली  देता  है तो इसका क्या विकल्प होगा ? वैसे मेरे विचार से बेनामी को तो आप रोक पाएंगे पर गलत पहचान वाली ईमेल से किया गया कमेन्ट कैसे रोकेंगे ? 
समाधान
हम ब्लॉग गूगल पर चलते है  ..अगर वह ऐसी सुविधा दे तो हमको इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा .......क्यूँ न जो कुछ करना हो वह गूगल पर किया जाये या कहा जाये जिससे किसी की मानहानि न हो और ब्लोगिंग भी चलती रहे और ब्लोगर का मान भ कायम रहे ...ये मेरा विचार है ..आप क्या सोचते हैं?
 

10 comments:

रचना said...

template theek karey post padhane mae bahut dikat hotee haen

honesty project democracy said...

बहुत ही सार्थक सोच और उम्दा विचार / ब्लोगिंग में जरूर बदलाव की जरूरत है,जिससे किसी का अपमान करने के लिए कोई इसका प्रयोग न कर सके / हलांकि कानून में व्यवस्था है जिसे हम सब को मिलकर प्रभावी बनाना होगा /दिल्ली में कल पूरे देश के ब्लोगरों के सभा का आयोजन किया जा रहा है जो ,नांगलोई मेट्रो स्टेशन के पास जाट धर्मशाला में किया जा रहा है ,आप सबसे आग्रह है की आप लोग इसमें जरूर भाग लें और एकजुट हों / ये शुभ कार्य हम सब के सामूहिक प्रयास से हो रहा है /अविनाश जी के संपर्क में रहिये और उनकी हार्दिक सहायता हर प्रकार से कीजिये / अविनाश जी का मोबाइल नंबर है -09868166586 -एक बार फिर आग्रह आप लोग जरूर आये और एकजुट हों /
अंत में जय ब्लोगिंग मिडिया और जय सत्य व न्याय
आपका अपना -जय कुमार झा ,09810752301

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

नीशू, ब्लौग पर मॉडरेशन लगाओ लेकिन अनामी-सनामी सभी कमेंट्स को आने दो यदि वे डिलीट किये जाने लायक नहीं हों.
चाहो तो गूगल पर केस कर दो, मैं तो वर्डप्रेस का चाहनेवाला हूँ.:)

yugal mehra said...

wordpresवर्डप्रेस का प्रयोग करें,

ana said...

comment ko delete bhi to kar sakte hai waise mai aapke vichar se sahamat hu

Udan Tashtari said...

मॉडरेशन लगाईये और क्या..

कूप कृष्ण said...

मान सम्मान कि इतनी ही चिन्ता है तो इस फोकटीये गूगल पर अपना टैम क्योन बरबाद कर रहे हो बच्चे।जायो कोई वेबसाईट बनायो और उस पर अपना समय दो तो पता चलेगा कि इन सब बातोन पर समय भ्र्स्ट करने का कोई फ़ायदा नहीन
और ये गूगल तुम्हारि बात सुनेगा जो तुम्को जगह दे रहा है लिखने बोलनेके लिये

कूप कृष्ण said...

ब्लोगर बेनामी से बड़ा दोषी है .....
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वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

तुम ऐसा लिखते ही क्योन हो कि तुमहारी रचना पर कोई उअल्टा सीधा कमेन्ट कर दे या गालियान दे दे या अश्ल्लील बातेन लिख दे
लिखो तुम और दोशी हो गूगल
किसी के घर मे ऐसा काम करो कि पडोसी मना करे और मारने आये तो दोष उस घर वाले का?????????????
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

अब गूगल लोगों की मानसिकता थोड़े ही सुधार सकता है नीशू भाई.
बाकी अभिव्यक्ति कि स्वतंत्रता होनी चाहिए एक दायरे में रहकर. आपका ये भी कहना सही है कि 'दिन भर बैठकर टिप्पणियाँ ही मोडरेट करते रहें?..

Vivek Rastogi said...

गूगल में बैठे हुए लोग रचनात्मक और खुले विचारों वाले लोग हैं उन्हें इन सब फ़ालतू की बातों के लिये समय नहीं मिलता। पर यह छिछालेदारी तो हर जगह चलती ही रहती है। इन सब पर ध्यान न दें और अगर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी आती है तो बेझिझक हटा दें, ब्लॉग के स्वामी आप हैं और टिप्पणी रखना या ना रखना आपका अधिकार है।