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Friday, November 27, 2009

हवा के झोंके में तुम्हारी याद ...........................कविता

हवा के झोंके ने
बंद पन्नों को बिखेरा है ,
आज फिर से ,
जिसमें तुम्हारी चंद यादें फिसल गयी,
फर्श पर
आंखों के मोती बनकर ।
मैंने रोकना चाहा
खुद को
पर
नाकाम ही रहा ,
तुम्हारी तस्वीर पर पड़े
आंसू ने
महसूस करना चाहा था
तुम्हारे स्पर्श को ,
तुम्हारी खुश्बू को ,
जो तुम ही दिये हैं मुझे
उम्र भर के के लिए ,
सर्द हवा ने याद दिलाया है ,
तुम्हारी गर्म सासों को,
तुम्हारे नर्म एहसासों को ,
मैं भूलकर भी
तुमको याद करता हूँ
ऐसे ही कभी -कभी
सुबहों में , शामों में

6 comments:

संतोष कुमार "प्यासा" said...

bhwana ko khoob hi rachnaatmak dhang se piroya hai

Mithilesh dubey said...

क्या बात है नीशू भाई । अतिसुन्दर भाव लगे इस कविता में ।

अनिल कान्त : said...

क्या भाई
लज्जतदार !!

योगेश स्वप्न said...

sunder rachna nishu, achchi abhivyakti.

Anonymous said...

aap kai toooooooooooooooooo

Anonymous said...

wah wah kya baat hai neeshoo ji.neha