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Thursday, January 14, 2010

देश अहम है या पैसा ?

देश के राष्ट्रीय खेल हाकी की दुर्दशा से सभी वाकिफ और हताहत है । ऐसे में खिलाड़ियों और हाकी इण्डिया का विवाद उत्पन्न होना वाकई बहुत ही दुखद है । और वह भी तब जब कि हाकी विश्व कप शुरू होने में कुछ ही महीने बचे हैं । खिलाड़ियों द्वारा पैसा न मिलने पर पुणे कैंप से बहिष्कार करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है । ऐसे में कई सवाल का उठना स्वाभाविक है । भारतीय हाकी अपने स्वर्णिम इतिहास के आज आस पास भी नजर नही आती ऐसे में अभ्यास का बहिष्कार करना कितना जायज है ?


दूसरा अहम सवाल यह है कि देश अहम है या पैसा ?

तीसरा सबसे मुख्य सवाल यह कि आखिर जब पेट भूखा हो तो देशभक्ति कैसे आ सकती है ? यानि हाकी इण्डिया ने ऐसी स्थिति ही क्यों उत्पन्न होने दी? जबकि हम खुद ही विश्व कप के आयोजक हैं । बागी हाकी खिलाड़ी ने मौके की नजाकत को देखते हुए बगावत के लिए अपनी आवाज बुलंद की , जबकि ऐसे मामलों को अभ्यास सत्र के दौरान उठाना किसी भी तरह से ठीक तो नहीं कहा जा सकता है ? खिलाड़ियों की मांग को देखा जाय.... यह गलत नहीं कहा जा सकता है पर यह मांग गलत समय पर जरूर उठायी जा रही है । आपसी बातचीत से भी यह मसला सुलझाया जा सकता था , जबकि हमारे पास समय कम है हाकी विश्व कप को देखते हुए ।


दूसरे अहम सवाल को देखा जाय कि देश अहम या पैसा ? इसमें किसी को जरा भी शक नहीं होगा कि देश ही सर्वोच्च है और पैसा द्वितीयक है । हाकी टीम के सदस्य निचले तबके से आये हैं ऐसे में पैसा भी बहुत अहम है पर यहां प्राथमिकता देश को देने की जरूरत थी जबकि ऐसा नहीं हुआ । खिलाड़ियों का प्रदर्शन मात्र उनका खुद का प्रदर्शन न होकर उस देश का भी प्रदर्शन होता है । ऐसे में अरबों भारतीयों के लिए यह विश्व कप सम्मान और प्रतिष्ठा का विषय है । जबकि हाकी इण्डिया ने यह कहा कि खिलाड़ी अभ्यास सत्र में हिस्सा लें ७ फरवरी को होने वाले चुनाव के बाद हम खिलाड़ियों की मांग मान लेंगें


तीसरा सवाल - जब पेट भूखा हो तो देशभक्ति क्या खाक करेंगें ? खिलाड़ियों की दैनिक दिनचर्या का भी पैसा यदि हाकी इंडिया न दे और यह कहे कि अभी हमारे पास पैसा नहीं है तो यह तर्क संगत नहीं कहा जा सकता है । खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं यदि न दी जाय तो उनसे किसी चमत्कार की उम्मीद भला किस आधार पर कर सकते हैं। इस समय तो जरूरत इस बात की थी कि खिलाड़ियों को उनकी सभी जरूरतों को बिना कहें ही उपलब्ध करा कर उनके मनोबल को बढ़ाना था.... जैसा कि नहीं हो रहा है । अन्तःकलह की स्थिति में हाकी टीम से भला पदक की उम्मीद कैसे की जा सकती है ?जबकि खिलड़ियों का आत्म विश्वास खुद अपनी व्यवस्था ही गिरा रहा है ।हाकी इंडिया की प्रतिक्रया भी सकारात्मक नहीं कहा जा सकती है । अन्ततः मामला सुलझना सुखद है उम्मीद करें की ऐसी स्थिति भविष्य में न आये । और हमारे खिलाड़ी अपने खेलका बेहतर प्रदर्शन करें ।

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