जन संदेश

पढ़े हिन्दी, बढ़े हिन्दी, बोले हिन्दी .......राष्ट्रभाषा हिन्दी को बढ़ावा दें। मीडिया व्यूह पर एक सामूहिक प्रयास हिन्दी उत्थान के लिए। मीडिया व्यूह पर आपका स्वागत है । आपको यहां हिन्दी साहित्य कैसा लगा ? आईये हम साथ मिल हिन्दी को बढ़ाये,,,,,, ? हमें जरूर बतायें- संचालक .. हमारा पता है - neeshooalld@gmail.com

Saturday, December 6, 2008

आंसू

उस दिन जब मैंने तुम्हारा हाथ पकड़ा ,

तो तुमने कहा..... नही..
और चंद आंसू जो तुम्हारी आँखों से गिरे..
उन्होंने भी कुछ नही कहा... न तो नही ... न तो हाँ ..
अगर आंसुओं कि जुबान होती तो ..
सच झूठ का पता चल जाता ..
जिंदगी बड़ी है .. या प्यार ..
इसका फैसला हो जाता...


विजय जी द्वारा लिखित

3 comments:

प्रशांत मलिक said...

बहुत अच्छे

रश्मि प्रभा said...

bahut achhi........par sach hai ki aansuon ki hi zubaan hoti hai,bahut gahri

राज भाटिय़ा said...

क्या बात है , भाई आंसू की भी जुबान होती है, वो जुबान जो दिल की सच्चाई को प्रकट करती है.
धन्यवाद