दिल की बात को बताना आसान नहीं होता ,
जब देखा है तुम को खोया ही रहता हूँ तुम्हारे ही ख्यालों ,
दिन तो कट जाता तुम्हारी राह तकते -तकते,
पर रात का एक- एक पल दिल को सजा देता है,
कब से दबा रखा है मैंने जज्बात दिल के,
अब बयां कर उनको तुमको पाना चाहता हूँ।
सारा हाल-ए-बताना चाहता हूँ,
बाहों में भरकर इस जहां से बहुत दूर जाना चाहता हूँ।
ये ख्वाहिशें कब पूरी होगी मेरी .......
इंतजार है उस पल का बेसब्री से ।।।।।।
Saturday, January 5, 2008
इंतजार उस पल का
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3 टिप्पणियाँ:
aajkal aur kuchh yad rahata nahi, ek bas aapki yad aane k bad......................achhi lagi.
ऐसे पलों का इंतज़ार भला किसे नहीं रहता?
सुंदर रचना....बधाई...
नीरज
सुन्दर भाव पूर्ण रचना है नीशू...
नया साल मुबारक हो...
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