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Tuesday, August 10, 2010

मैं तो बस ....(कविता)........neeshoo tiwari

न कोई मजहब है मेरा 
न कोई भगवान है
मैं तो बस इन्सान हूँ 
इंसानियत मेरी पहचान है..
न कभी मंदिर गया मैं
न कभी गुरूद्वारे में 
मैं तो बस देखता हूँ 
सबमें ही भगवान है .
न किसी से इर्ष्या हो 
न किसी से बैर हो 
मैं तो बस ये चाहता हूँ 
सबमें ख़ुशी और प्रेम हो 
पढता हूँ मैं खबर 
शहर कत्लेआम की 
हो दुखी नम आँखों से
क्या खुदा , क्या राम है..
आज मैं मैं कर रहा 
कल खाक में मिल जाऊंगा 
सांसे टूट जाएगी एक दिन
क्या साथ मेरे जायेगा ...
आओ हम ये दूरी मिटा दें 
न कोई हो दुर्भावना 
राम पूजे मुसलमान 
हिन्दू खुदा के साथ हो 
मैं किसी को न कहूँगा 
तुम कभी न छोडो धरम 
राम , रहमत के नाम पर 
तुम मिटा दो फासला ..

8 comments:

Pandit Kishore Ji said...

bahut achha likha hain

DR. ANWER JAMAL said...

दिल खुश हो गया आपके ब्लॉग पर आकर। शुक्रिया इतनी सुंदर पंक्तियों के लिये।
थोड़ा सा सुधार कर कहते तो और अच्छा होता। जैसे कि -
कहते हैं रहीम जिसे वही राम है
नेकी ही फ़क़त बन्दे का काम है।

संगीता पुरी said...

बहुत बढिया नीशू जी !!

सलीम ख़ान said...

waqaee!?

great !

Mithilesh dubey said...

bahut khub likha bhiya aapne, man khush ho gaya

SACHIN JAIN said...
This comment has been removed by the author.
SACHIN JAIN said...

bahut achaa likha hai.........maine bhi kabhi issi thought par likha tha.......time mile to padna..... http://sachinjain7882.blogspot...st_11.html
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rohitler said...

उम्दा प्रस्तुति...