उनकी एक झलक पाने की ख़ातिर
हम नैन बिछाए रहते हैं
न जाने कब वो आ जाएं
इस कारण एक आँख राह में
और दूजा काम में टिकाए रखते हैं
इंतज़ार ख़त्म हुआ
उनका दीदार हुआ
सोचा था जब वो मिलेंगे हमसे
दिल की बात बयाँ करेंगे
अपने सारे जज़बात उनको बता देंगे
हाय ये क्या गजब हुआ
जो सोचा था उसका विपरीत हुआ
वो आए..थोड़ा सा मुस्कुराए
और कह दी उन्होने ऐसी बात
जिससे दिल को हुआ आघात
कहा उस ज़ालिम ने
मेरा हमदम है कोई और
मेरी मंज़िल है कोई और
बस कहने आया था दिल की बात
फिर होगी अगले बरस मुलाकात
Wednesday, February 27, 2008
उनकी एक झलक पाने की ख़ातिर
द्वारा भेजा गया
neeshoo
पर
5:38 AM
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment