अभी कुछ दिन हुए इंटर नेशनल ब्लोगर सम्मलेन को हुए ...........एक अच्छी पहल है इस तरह का आयोजन ........लेकिन इससे पहले का दिल्ली के लक्ष्मी नगर में ब्लोगर सम्मलेन हुआ था ....जिसको मैंने " खाने खिलाने " से ज्यादा कुछ भी नहीं समझा था ...ब्लोगर भाइयों को यह बात ख़राब लगी ..पर सचे दिल से आज भी मैं उसी बात को सही पता हूँ ......दिल्ली ब्लोगर सम्मलेन के आयोजकों को बस यही बात ख़राब नहीं लगी बल्कि वे यहाँ तक उतारू हो गए की बेनामी से भी कमेन्ट करने से बाज नहीं आये ....कुछ प्रमुख बिन्दुओं को लिख रहा हूँ जिससे आयोजक भी इनकार नहीं कर सकते ....
१..............बेनामी कमेन्ट ....
मैंने कुछ दिन पहले लिखा था की " क्या मर रही है ब्लोगिंग ?एक विचार " पर बेनामी से कमेन्ट आया की ....अजय जी ने पैसे खाए है...दूसरा यह की " सम्मलेन में रचना जी और अनूप शुक्ल जी भी आये थे ....जो मसिजीवी से ही मिल कर चले गये ? यह बात तो आजतक भी मुझे न पता चल पाई थी ...लेकिन लक्ष्मी नगर में हुए ब्लोगर सम्मलेन में रचना जी ओ अनूप शुक्ल जी आये तो यह बात सभी उपस्थित ब्लोगर से छिपाई क्यों गयी ?
दूसरा यह की ( नाम न बताने की शर्त पर एक ब्लोगर जो की आयोजक के बहुत ही करीबी है ....उन्होंने बताया की रचना जी और अनूप जी के आगमन की बात ३ से चार ब्लोगर को ही पता थी ) अगर बेनामी से कमेन्ट आया तो इसका मतलब यह की वोह कमेन्ट करने वाले महाशय भी आयोजको में से ही हैं ...इसका मतलब की चोरी भी सीना जोरी भी ...वैसे जिसने किया वहहै वो समझ गये होगे ...अब आयोजक कौन थे ? ये आप खुद ही पता लगाईये ?
२.............सूचना ....
दुसरे इंटर नेशनल सम्मलेन में हमको और मिथिलेश दुबे जी को नहीं बुलाया गया .....वैसे ये तो आयोजक की इच्छा पर था ...मिथिलेश जी को भी कोई सुचना मिली .....हाँ बाद में रपट देख लिया था ...मिथिलेश जी ने तो कहा ...की भाई हम उस काबिल नहीं जो वह पर हमको बुलाया जाता ...बात वैसे सही भी है ...पर मिथिलेश भाई ने साफ कहा की चलो कम से कम गुटबाजी से बचे ..... दूसरी तरह यह भी कहता हूँ मैं की हमको तो बहिस्कृत किया गया ...इसमें किसी का दोष नहीं ...बस समय ही ऐसा बना आया की ये तो होना ही था..
३...............चुपके चुपके ....
कुछ बात तो अब तक छिपी है लेकिन धीरे धीरे ही सही पर बाहर आएगी ही .......वैसे विचार में समानता और असमानता ही हमको दोस्त और दुश्मन बनाती है .... यानि नज़दीक और दूर करती है
तो यहाँ भी आश्चर्य क्यों ???????
